राजभाषा हिंदी ॥ Rajbhasha Hindi

राजभाषा संबंधी प्रावधान 

  1. संवैधानिक प्रावधान 
  2. राजभाषा अधिनियम 1963 
  3. राजभाषा नियम, 1976

राजभाषा कार्यान्वयन के मार्ग में रही बाधाएँ

  1.         अधिकारियों और अनुसचिवीय कर्मचारियों के अनुपात में हिंदी कैडर कर्मियों की कमी है। नियमानुसार प्रति 100 कर्मचारियों पर एक हिंदी अधिकारी होना चाहिए, लेकिन हिंदी में कार्य करने में हो रही परेशानियों को देखते हुए प्रति 100 पर दो हिंदी अधिकारी देने की नीति बननी चाहिए।
  2.    बहुत से कार्यालयों में पत्र का मुख्य भाग अँग्रेजी में रहता है और संबोधन व हस्ताक्षर हिंदी में कर इसे हिंदी पत्रों में गिनती कर लिया जाता है। राजभाषा कार्यान्वयन के लिए पत्रों का यह प्रचलन बहुत बड़ी बाधा है। इससे केवल हिंदी पत्रों का आंकड़ा बढ़ रहा है, हिंदी कार्यान्वयन नहीं।
  3. .   कुछ विभागों के कार्य पूरी तरह से तकनीकी प्रकृति के हैं, उनमें पूरी तरह से हिंदी में कार्य करने में ढेर सारी समस्याएँ आ रही हैं। बहुत सारी रिपोर्ट ऑनलाइन और कुछ विशेष साफ्टवेयर से बनती हैं और अभी उसमें हिंदी में कार्य नहीं हो पा रहा है। कुछ साफ्टवेयर यूनिकोड समर्थित नहीं हैं।
  4.    कुछ कार्यालयों में ऑफिस मैनेजमेंट के साफ्टवेयर के पुराने वर्जन पर ही काम चल रहा है, अभी उसमें यूनिकोड समर्थन नहीं हो पाया है, इसलिए वहाँ पर भी समस्या आ रही है।
  5.     बहुत बार से ऊपर के कार्यालयों से आने वाले पत्र अंग्रेजी में होते हैं, इसलिए उस पर कार्रवाई करने वाले अधिकारी भी अंग्रेजी में काम करना शुरू कर देते हैं।
  6.    अंग्रेजी में कार्य करने वालों हिंदी भाषियों को विभिन्न तरीकों से हतोत्साहित करने की आवश्यकता है।
  7.    धारा 3(3) के दस्तावेजों को द्विभाषी रूप में तैयार करना बहुत मुश्किल हो जाता है। कर्मचारी दोनों भाषाओं में काम करने के बजाए एक ही भाषा में काम करना अधिक पसंद करते हैं।
  8.   हिंदी भाषी क्षेत्रों में धारा 3(3) के कुछ दस्तावेज़ जैसे- कार्यालय आदेश, परिपत्र आदि को अंग्रेजी की अनिवार्यता से हटाकर केवल हिंदी में निकालने की छूट देनी चाहिए।
  9.    राजभाषा के संबंध में कुछ ऐसी नीति निर्धारित की जाए, जिससे निजी क्षेत्र में भी हिंदी का प्रवेश कराया जा सके, जैसे – हिंदी क्षेत्रों में दुकानों के नाम, वस्तुओं की पैकिंग पर सूचना आदि भी हिंदी में अनिवार्य तौर दी जाए।
  10.    सभी सरकारी कंपनियों की वेबसाईट के हिंदी वर्जन पहले खुलें, तथा अंगरेजी व अन्य भाषाओं में वेबसाइट के लिंक उस पर डाले जाएँ, यह आदेश राजभाषा विभाग द्वारा सभी कार्यालयों को जारी किया जाना चाहिए, ताकि हिंदी को प्रमुखता दी जा सके। साथ ही हिंदी वेबसाइट को अवश्य अपडेट किया जाए।

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