कोरोना अपडेट - 10 अप्रैल, 2020

क्या है भीलवाड़ा मॉडल ? 

कोविद-19 यानि कि कोरोना विषाणु जनित महामारी पूरी दुनिया भर में गुणोत्तर श्रेणी में बढ़ती जा रही है। पूरा अमेरिका, पूरा यूरोप विशेषकर स्पेन, इटली, फ्रांस, इंग्लैंड, पूरा एशिया, दक्षिण अमेरिका, आस्ट्रेलिया और आंशिक रूप से अफ्रीका बहुत बड़े संकट में फंस चुका है। दुनिया भर के देश अपने-अपने तरीके से इससे निपटने के प्रयास कर रहे हैं।  वर्तमान में भारत में भी कुछ क्षेत्रों में तेजी से इसका प्रसार हो रहा है तो कुछ क्षेत्रों में नियंत्रित है। इन तमाम ऊहापोहों के मध्य एक सकारात्मक खबर आई है राजस्थान के भीलवाड़ा क्षेत्र से। शुरुआती दौर में 31 मार्च, 2020 के आसपास लग रहा था कि इस छोटे से स्थान में कोरोना वायरस सामुदायिक प्रसार के स्तर पर फैल जाएगा। पूरा देश इससे परेशान हो रहा था। 
लेकिन भीलवाड़ा के जिला प्रशासन और नागरिकों ने मात्र 10 दिनों में इस पर इस प्रकार से नियंत्रण प्राप्त किया कि आज पूरी दुनिया में भीलवाड़ा मॉडल चर्चा का प्रमुख बिन्दु बन गया है। 
अब दुनिया भर की मीडिया में एक ही चर्चा कि कैसे आखिर भारत में सबसे पहले कोरोना जोन बने भीलवाड़ा ने वायरस के खिलाफ महायुद्ध जीत लिया है। इतने कम समय में कोरोना को हराना अभी तक दुनिया भर में यहीं पर हुआ है। इस जीत के मूल मंत्र हैं- ठोस रणनीति, कड़े फैसले, जनता का साथ।  और जो भीलवाड़ा बारूद के ढेर पर खड़ा था आज वहीं प्रशासन पर यहाँ के नागरिक फूलों की बारिश कर रहे हैं। अब यहाँ पर केवल चार मरीज हैं। 

साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन 
55 वार्ड परिषद वाले भीलवाड़ा में दो बार पूरी तरह से सैनिटाइजेशन किया जा चुका है। हर गली, हर मोहल्ले, हर चौराहे पर हाइपोक्लोराइड का छिड़काव किया गया है। 

हाई रिस्क जोन को सील किया जाना 
यहाँ पर सबसे पहले जिस अस्पताल में स्टाफ संक्रमित पाया गया, उस अस्पताल को सील करने के साथ ही पिछले एक महीने में यहाँ पर इलाज करा चुके सभी लोगों को क्वारंटीन किया गया। इनमें कुछ मरीज दूसरे राज्यों के भी थे। 

सबसे ज्यादा स्क्रीनिंग 
यहाँ पर पूरे देश में 25 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गयी। 6000 से अधिक स्वास्थ्य कर्मचारियों को इसमें लगाया गया। मरीज के संपर्क लोगों की पहचान कर उन्हे अलग किया गया। 7000 से अधिक लोगों को होम क्वारंटीन किया गया। 

कर्फ़्यू और फिर महाकर्फ़्यू 
यहाँ पर 20 मार्च को ही कर्फ़्यू लगा दिया गया था और फिर 03 से 14 अप्रैल के लिए महाकर्फ़्यू लगाया गया। इससे वायरस की चेन टूटने लगी। 

हर मरीज के क्षेत्र में कर्फ़्यू 
जिले में जहां भी कोरोना संक्रमित मिला वहीं पर कर्फ़्यू लगाया गया। यही नहीं उस क्षेत्र के 1 किमी के क्षेत्र को नो मूवमेंट जोन घोषित किया गया। 

राशन वितरण 
इसके लिए जिला प्रशासन ने बहुत मेहनत की और सभी के घर पर राशन की होम डिलिवरी करवायी और लोगों को बाहर निकालने पर एकदम पाबंदी लगा दी। 

सीमाएं सील 
पूरे जिले की सीमाएं सील कर दी गईं। लोगों का कहीं आना-जाना एकदम रुक गया। 

नागरिक सहयोग 
इस जीत का सेहरा भीलवाड़ा के नागरिकों के सर बांधा जाना चाहिए। उन्होने प्रशासन का बहुत अधिक साथ दिया और इस वजह से दुनिया में कोरोना की पहली लड़ाई वे जीत चुके हैं। 

अब आवश्यक है कि ऐसे अनुशासन को लगातार बनाए रखा जाए। कई यूरोपीय देशों के प्रतिनिधि राजस्थान के मुख्य सचिव से फोन पर बात करके भीलवाड़ा मॉडल के लिए टिप्स प्राप्त कर रहे हैं।  आज हमारे देश में लाकडाउन लागू है। आवश्यक है कि हम इसका पूर्ण पालन करें। अगर देश का एक जिला इसे परास्त कर सकता है, तो पूरा देश क्यों नहीं। 

आज भारत की ताजा स्थिति 


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